"जहानाबाद संसदीय सीट पर दावेदारी से आशुतोष भैया का पीछे हटना अपने आप में है एक मिसाल"
राजनीति और जंग ऐसी बिसात मानी जाती है जहाँ सब कुछ जाईज माना जाता है, परम्परागत राजनीति में गुथे हुए लोग एक बार बढ़ा हुआ कदम वापिस नहीं खींचा करते, ऐसी स्थिति में आशुतोष भैया ने एक उत्कृष्ट उदहारण पेश करके मतों के स्वाभाविक विभाजन का कारण न बनना पसंद किया व आपसी प्रतिद्वंदिता में समाज को उत्साहहीन होने से बचाया है | उन्होंने यह साबित कर दिया कि परंपरागत राजनीति करने वालों से सोंच में और कर्म से भी वो बिल्कुल भिन्न हैं |
पूर्व के कई उदाहरण हैं जिन्हें आपके सामने रखना भी जरुरी है जिससे इस कदम के आप महत्त्व को आप समझ सकेंगे:
1. जहानाबाद सीट जिसपर उन्होंने अपनी दावेदारी पेश की थी वहां पर पिछले दो संसदीय चुनाव इस मामले में उदाहरण हैं, 2009 के चुनाव में श्री जगदीश शर्मा यहाँ से सांसद चुने गये, इस चुनाव में सीटिंग सांसद होने के बावजूद टिकट नहीं मिलने पर अरुण कुमार जी कांग्रेस का पंजा पकड़ कर मैदान में कूद गये, अरुण कुमार जी का जमानत जप्त हो गया, अगर वह निर्णायक मत काटने में सफल हो गये होते तो इसका सीधा लाभ राजद प्रत्याशी सुरेन्द्र यादव को मिलता और वह चुनाव जीत जाता |
2. जहानाबाद संसदीय सीट पर 2014 के चुनाव में भी दो प्रमुख प्रत्याशी भूमिहार खड़े हो गये, एक धनसेठ अनिल शर्मा और दूजे अरुण कुमार लेकिन जबरदस्त मोदी लहर का लाभ लेते हुए अरुण कुमार संसद पहुँच गये, यहाँ पर भी अगर समाज के मतों का गहरा विभाजन अगर हुआ होता तो राजद प्रत्याशी संसद पहुँच गया होता |
"उक्त दोनों मामलों में समाज अरुण कुमार बनाम जगदीश शर्मा जी के वर्चस्व के जंग का मूकदर्शक बना रहा, किसी ने दावेदारी वापिस नहीं ली थी"
3. पिछले विधान सभा चुनाव में अखिलेश सिंह जो वर्तमान सांसद हैं, वह तरारी सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी थे और दुसरे तरफ से लोजपा के टिकट पर बाहुबली सुनील पाण्डेय की पत्नी गीता पाण्डेय प्रत्याशी थीं, मुकाबला त्रिकोणीय हो गया और सी पी आई माले प्रत्याशी सुदामा प्रसाद चुनाव जीत गया, आज उस क्षेत्र के लोगों से जाकर उनकी स्थिति के बारे में जानकारी ले लें |
4. इस लोक सभा चुनाव में मुंगेर का उदाहरण ही देख लीजिये, बिहार के प्रमुख बाहुबलियों का अखाडा बन चुका है यह सीट, भूमिहार को भूमिहार के खिलाफ आजमाया जा रहा है, यहाँ पर समाज भी चुप चाप मौन है और तमाशा देख रहा है, समर्थक और विरोधी गुट में बंटा हुआ है |
ऐसे अनेकानेक उदारहरण हमारे चारों तरफ बिखरे पड़े हैं लेकिन आशुतोष भैया ने साहस और त्याग परिचय देते हुए समाज को निर्णायक फैसला ले सकने की स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया, समय बतायेगा कि इसकी कीमत समाज समझ पाता है कि नहीं !!
#साकेत_बिहारी_शर्मा
#भूमिहार_ब्राह्मण_एकता_मंच_फाउंडेशन
पूर्व के कई उदाहरण हैं जिन्हें आपके सामने रखना भी जरुरी है जिससे इस कदम के आप महत्त्व को आप समझ सकेंगे:
1. जहानाबाद सीट जिसपर उन्होंने अपनी दावेदारी पेश की थी वहां पर पिछले दो संसदीय चुनाव इस मामले में उदाहरण हैं, 2009 के चुनाव में श्री जगदीश शर्मा यहाँ से सांसद चुने गये, इस चुनाव में सीटिंग सांसद होने के बावजूद टिकट नहीं मिलने पर अरुण कुमार जी कांग्रेस का पंजा पकड़ कर मैदान में कूद गये, अरुण कुमार जी का जमानत जप्त हो गया, अगर वह निर्णायक मत काटने में सफल हो गये होते तो इसका सीधा लाभ राजद प्रत्याशी सुरेन्द्र यादव को मिलता और वह चुनाव जीत जाता |
2. जहानाबाद संसदीय सीट पर 2014 के चुनाव में भी दो प्रमुख प्रत्याशी भूमिहार खड़े हो गये, एक धनसेठ अनिल शर्मा और दूजे अरुण कुमार लेकिन जबरदस्त मोदी लहर का लाभ लेते हुए अरुण कुमार संसद पहुँच गये, यहाँ पर भी अगर समाज के मतों का गहरा विभाजन अगर हुआ होता तो राजद प्रत्याशी संसद पहुँच गया होता |
"उक्त दोनों मामलों में समाज अरुण कुमार बनाम जगदीश शर्मा जी के वर्चस्व के जंग का मूकदर्शक बना रहा, किसी ने दावेदारी वापिस नहीं ली थी"
3. पिछले विधान सभा चुनाव में अखिलेश सिंह जो वर्तमान सांसद हैं, वह तरारी सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी थे और दुसरे तरफ से लोजपा के टिकट पर बाहुबली सुनील पाण्डेय की पत्नी गीता पाण्डेय प्रत्याशी थीं, मुकाबला त्रिकोणीय हो गया और सी पी आई माले प्रत्याशी सुदामा प्रसाद चुनाव जीत गया, आज उस क्षेत्र के लोगों से जाकर उनकी स्थिति के बारे में जानकारी ले लें |
4. इस लोक सभा चुनाव में मुंगेर का उदाहरण ही देख लीजिये, बिहार के प्रमुख बाहुबलियों का अखाडा बन चुका है यह सीट, भूमिहार को भूमिहार के खिलाफ आजमाया जा रहा है, यहाँ पर समाज भी चुप चाप मौन है और तमाशा देख रहा है, समर्थक और विरोधी गुट में बंटा हुआ है |
ऐसे अनेकानेक उदारहरण हमारे चारों तरफ बिखरे पड़े हैं लेकिन आशुतोष भैया ने साहस और त्याग परिचय देते हुए समाज को निर्णायक फैसला ले सकने की स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया, समय बतायेगा कि इसकी कीमत समाज समझ पाता है कि नहीं !!
#साकेत_बिहारी_शर्मा
#भूमिहार_ब्राह्मण_एकता_मंच_फाउंडेशन

Appreciable step took by Ashutosh bhaiya..I respect his decision which was took in favour of our community..he us real best wisher of our community..Jay Sri parshuram
ReplyDeleteबहुत ही सूझबूझ भरा निर्णय और सफल निर्णय आशुतोष भैया के तरफ से लिया गया है यह निर्णय आने वाले समय में समाज को एक नई दिशा देगी
ReplyDeleteAbhishek rai up deoria loksabha
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