"भूमिहार ब्राह्मणों के उपेक्षा की कहानी, पूर्व प्रदेश महामंत्री (बिहार-भाजपा) सुधीर शर्मा की जुबानी"
"भूमिहार ब्राह्मणों के उपेक्षा की कहानी, पूर्व प्रदेश महामंत्री (बिहार-भाजपा) सुधीर शर्मा की जुबानी"

पहले जख्म दिया अब दवा देने का दिखावा-
भाजपा भूमिहार-ब्राम्हण समाज के साथ जो लगातार उपेक्षापूर्ण और अपमानजनक व्यवहार करते आ रही थी उसका चर्मोत्कर्ष अभी के लोकसभा
चुनाव में दिखा।इस समाज के लोगों ने न केवल भाजपा के विशाल वट वृक्ष का
बिहार में बीजारोपण किया बल्कि उसको पुष्पित-पल्लवित करने में अपना सर्वस्व
न्योछावर कर खाद - पानी बनने का काम किया। जिस संगठन को खड़ा करने में अपना
खून तक दिया -अब बहार आयी तो कहते हैं तेरा काम नहीं ।
पहले ही लालु विरोध के नाम पर मुजफ्फरपुर, वैशाली, महराजगंज,
पाटलिपुत्र ,मोतिहारी,मधुबनी जैसी लोकसभा सीटों को गंवा बैठा समाज के लिए
अब जहानाबाद, वाल्मीकिनगर और कटिहार पर भी संकट है।लगातार 15 वर्षों तक
सांसद रहे और मात्र 2014 में एक बार हारे जन्मजात भाजपाई निखिल चौधरी के
सीट को गठबंधन में दे देना और एक बार सांसद रहे लगातार दो चुनाव हार चुके
आयातित प्रदीप सिंह के लिए अररिया सीट रख लेना भाजपा की भूमिहार विरोधी
मानसिकता का परिचायक है।राजद पृष्टभूमि की रमा देवी और संजय जायसवाल भाजपा
के लिए आवश्यक है लेकिन सतीश दुबे की सीट इसलिए जदयू को दे दिया गया
क्योंकि वह ब्राम्हण हैं।संघ-विद्यार्थी परिषद के रास्ते भाजपा के झारखंड
के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रविन्द्र राय का टिकट काटकर राजद की प्रदेश
अध्यक्ष अन्नपूर्णा देवी को टिकट देने कहाँ का न्याय है ?रविन्द्र राय को
भूमिहार होने की सजा मिली।जबकि कोडरमा भूमिहारों की परंपरागत सीट रही है।
5 बार के सांसद रविन्द्र पांडेय के सीट
गिरिडीह को गठबंधन में दे देना भाजपा के ब्राम्हण विरोधी प्रवृत्ति का
द्योतक है।एकबारगी पूरे हिंदुस्तान के सभी स्थापित ब्राम्हण नेताओं को
बेटिकट कर अपमानित किया गया।सर्वश्री मुरली मनोहर जोशी, शांता कुमार, कलराज
मिश्र, भुवन चंद्र खंडूरी, अटल जी के सगे भांजे अनूप मिश्रा, सुषमा स्वराज
,सुमित्रा महाजन सबका टिकट काट दिया गया।दिवंगत अनंत कुमार की पत्नी जो
भाजपा में सक्रिय हैं उनको टिकट नहीं दिया गया लेकिन हुक्मदेव नारायण यादव
इनके लिए ऊपर वर्णित सभी नेताओं से ज्यादा से ज्यादा महत्वपूर्ण हैं जिनका
टिकट काटकर उनके पुत्र अशोक यादव को मधुबनी से चुनाव लड़ाया गया।
मित्रों यह सब अचानक या अनजाने में नहीं हुआ है।यह इनके मन मे भूमिहार
-ब्राम्हणों के भरे जहर के कारण है।बिहार में लंबे समय से समाज के विरुद्ध
षड्यंत्र चल रहा है।प्रदेश के नेतृत्व वर्ग में कोई सवर्ण नहीं
है।नीतिनिर्धारण में जब आपका कोई नहीं बैठेगा तो कौन आपकी बात करेगा
?प्रदेश भाजपा के अधिकृत बैनर -पोस्टर पर किसी सवर्ण नेता की तस्वीर नहीं
होती है।जिसका एक वोट नहीं मिलता है उसके नेताओं को माथे पर बैठाया गया है
और जिसके बदौलत सत्ता में हैं उसके नेताओं को लतियाना यह कोई कालिदास ही कर
सकता है। जिस रामकृपाल यादव से एक वोट का फायदा नहीं है उसको भी
राज्यमंत्री और गिरिराज सिंह एवं अश्विनी चौबे भी राज्यमंत्री ।
आज चुनाव में भूमिहार ब्राह्मण समाज की उदासीनता और नाराजगी की खबर
से डरा हुआ नेतृत्व कुछ लोगों से बात कर शुतुरमुर्गी कवायद कर रहा
है।महत्वपूर्ण व्यक्ति नहीं मुद्दे होते हैं।समाज को मुद्दों का जबाब
चाहिए।कितना हल्के ढंग से बात को रफा दफा किया गया ?किसको बेवकूफ बना रहे
हैं ?राज्यसभा और विधान परिषद में प्रतिनिधित्व कौन नई बात कह दिया। 2020
में तो ऐसे ही एक राज्यसभा और एक विधानपरिषद में भूमिहार समाज से लोग
रिटायर हो रहे हैं।अगर उन जगहों पर इस समाज से दुबारा भी भेजते हैं तो कौन
सी कृपा होगी ?
इन सभी ज्वलंत मुद्दों पर
चर्चा के लिए पटना के विद्यपति भवन में 27 अप्रैल को 11 बजे से एक
प्रतिनिधि बैठक बुलाई गई है ।आप सभी सादर आमंत्रित हैं।
-- साकेत बिहारी शर्मा
(नोट: भूमिहार ब्राह्मण एकता मंच फाउंडेशन इस आयोजन का हिस्सा नहीं है, बाकी जाना न जाना आपकी निजी स्वतंत्रता है |)
We r thinking to attend this meeting..bt we had a doubt that will our organisation permit us to attend it..now it is confirmed after ur blog..that we r permitted thanku bhaiya🙏🏽🙏🏽
ReplyDeleteभूमिहार ब्राह्मण एकता मंच फाउंडेशन इस आयोजन का हिस्सा नहीं है, बाकी जाना न जाना आपकी निजी स्वतंत्रता है |
Delete