"भूमिहार ब्राह्मण एकता मंच के राष्ट्रीय संरक्षक श्री अरुण साहब बने
बेसहारा बच्चों के लिये मसीहा"
★★ शायद ही किसी ने परमात्मा का साकार स्वरुप देखा हो लेकिन मैंने इंसान में उस पालनहार ही छवि जरूर देखी है। ★★
जी हाँ, मैं बात कर रहा हूँ, बिहार राज्य के बरबीघा के कुठौत गाँव की जहाँ से एक अत्यंत ह्रदय विदारक घटना हमारे सामने अायी, “भूख से मौत वह भी एक भूमिहार ब्राह्मण का”, शायद इसपर आज भी बहुतों को यकीन नहीं हो रहा होगा लेकिन यह सत्य है कि हमारा बहुत तेजी से आर्थिक पतन हो रहा है, इस सत्य का अहसास अगर करना है तो विनयपूर्वक कहता हूँ कि कृपया अपने जातीय दंभ से जरा बाहर निकलें और समाज की सूध लें।क्योंकि यह समाज अत्यंत स्वाभिमानी है तो संभव है कि कई मामले तो समाज के बीच कभी उजागर हो ही नहीं पाते होंगे। लेकिन आज उससे भी महत्वपूर्ण हमारी प्रतिक्रिया है, आखिर इस स्थिति से निपटने के लिये हमने क्या किया ? बारंबार मेरे मन में भी यह बातें बिजली सी कौंध उठती थीं कि क्या समाज का संपन्न वर्ग अपना स्नेहाशीष या दायित्व समझकर उनके तरफ हाँथ बढायेगा ? इन सब के बीच अपने हृदय का द्वार खोलते हुये भूमिहार ब्राह्मण एकता मंच के राष्ट्रीय संरक्षक अादरणीय श्री अरुण कुमार सिंह साहब उम्मीद से चार कदम बढकार उन बेसहारा परिवार के भविष्य को संयोजने के लिये तत्परता दिखाई जिसके लिये हम सभी उनके ऋणी हैं।
➤ ग्रामीण निवासियों व मंच के वरीय पदाधिकारियों जिनमें मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अाशुतोष भइया, कर्मठ और लगनशील अभिभावक श्री प्रसुन कुमार भल्ला दा, शेरे गोपालगंज श्री उमेश शाही जी, माननीय श्री सर्वेश जी, बिहार प्रदेश महासवोच श्री अशोक कुमार, गोपालगंज जिलाध्यक्ष श्री विवेक राय जी, गोपालगंज जिला उपाध्यक्ष श्री अचल सिंह जी, पटना प्रमंडल प्रभारी श्री शशि जी, सक्रिय सदस्य श्री शिशु ठाकुर व अन्य गणमान्य लोग शामिल हैं, उनकी उपस्थिति में अादरणीय श्री अरुण साहब ने कहा, “जब तक ये बच्चा जहाँ तक पढ़ना चाहे इसके रहने खाने पढ़ने की सारी जबाबदेही हमारी है, अभी तक ये बच्चा गरीब था पर अब से गरीब नहीं रहा, इसके साथ पुरा समाज खडा है।” ग्रामीणों की सहमति से बच्चे की दाखिला बरबीघा के St. Mary School के छात्रावास में कराया गया, साथ ही साथ academic year यानि मार्च महीने तक की फीस अग्रिम रुप में चेक के माध्यम से (Rs 35,000/-) प्रिंस सर के पास जमा कर दी गयी। प्रिंस सर की भी उदारता देखिये, उन्होंने admission का फीस माफ कर दिया, साथ ही साथ कहा, “इस बच्चे के साथ इस बच्चे की बहन को भी वो बिना स्कूल फीस लिये पढायेंगे, लडका छात्रावास में ही रहेगा और लडकी स्कूल बस से रोज अाया जाया करेगी।”
➤ अाशा और विश्वास है कि एेसे उदाहरण समाज में नई उर्जा का सृजन करेंगे, यह कदम समाज के बीच सौहार्द और एकरुपता लाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
✂︎ पर हाँ, एक हिदायत, एक सबक उनके लिये है जो इस घटना को सामने लाने व इसपर त्वरित और समूचित कदम उठाये जाने से इतना घबरा गये थे कि उन्हें साजिशें रचनी पड रहीं थीं। उनके लिये प्रायश्चित का मार्ग भी खुला है, वे अगर कान एेंठकर अपने दोनों हाथों से अपने दोनों गालों पर खुद से जोर का तमाचा लगा लें तो शायद पाप का बोझ कुछ हल्का हो जाये और सद्बुद्धि मिले, यह उपाय गुरुकुल परंपरा में भी बहुत कारगर था।
जय परशुराम !!
जय ब्रह्मेश्वर !!
✍︎ साकेत बिहारी शर्मा
प्रधान महासचिव सह प्रवक्ता
भूमिहार ब्राह्मण एकता मंच