"दो लाख भूमिहारों का वोट मगनी में नहीं मिलेगा, होश में आईये आरा सांसद व प्रत्याशी आर के सिंह"
{{ शाहाबाद क्षेत्र
में जिस नक्सल उग्रवाद के खिलाफ राजपूत समाज हमसे ज्यादा संख्या व रसूख रखते हुए भी नहीं लड़ पाया था, उससे निर्णायक लडाई लड़ने वाले यही भूमिहार ब्राह्मण थे, सांसद R K Singh शायद भूल चुके हैं इतिहास....}}
→ 90 के निर्णायक लडाई के बहुत पहले 1969 में राजपूतों ने रखा था "कुंवर सेना" का नींव, बिहार में नक्सल उग्रवाद के केंद्र भोजपुर में भूमिहारों से ज्यादा त्रस्त था राजपूत समाज लेकिन बाबु कुंवर सिंह के नाम पर स्थापित इस सेना के प्रमुख किरदार कोयला माफिया राजनाथ सिंह, भूतपूर्व विधायक वीर बहादुर सिंह आंतरिक गुटों के संघर्ष में मारे गये, वहीँ दनवार-बिहटा में 22 माले समर्थकों को मौत के घाट उतारने वाले व देव और सहाईरा गांवों में नरसंहार को अंजाम देने वाले तरारी ब्लाक के सरपंच ज्वाला सिंह भी नक्सालियों के हथियारबंद संघर्ष के शिकार हो गये.....और संघटन तिरोहित हो गया....
→ रणवीर आन्दोलन के जन्म से पहले राजपूत अस्मिता की लडाई लड़ने वाला दियारा क्षेत्र में एक और संगठन सक्रिय था जिसका नाम था "शिव गंगा सेना", शिव गंगा सेना का भी विलय रणवीर सेना में हो गया यानी भूमिहारों ने राजपूतों को सदा अपने बराबर मान सम्मान दिया.....
लेकिन बदले में क्या मिला...!
→ रणवीर सेना सुप्रीमो बाबा ब्रह्मेश्वर मुखिया जी ने आरा संसदीय सीट पर जेल से 2004 में उतरे, भूमिहार समाज का एकमुस्त समर्थन मुखिया बाबा को मिला, परिणामस्वरूप उनके "डोली" छाप पर 1,48,957 मत पड़ें पर वह तीसरे स्थान पर रहे, अगडी जाति के अस्मिता की लडाई लड़ने वाले मुखिया बाबा चुनाव हार गये | और आज वही एकमुस्त वोट हमारा NDA के राजपूत प्रत्याशी को जाता है.....|
तो सुन लीजिये
हमारे
राष्ट्रीय अध्यक्ष आशुतोष भैया का पैगाम,


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