Saturday, 6 September 2025

अरवल विधानसभा पर भूमिहारों की दावेदारी का इतिहास: साकेत बिहारी शर्मा

 

अरवल विधानसभा पर भूमिहारों की दावेदारी आजादी के बहुत बाद 1977 में जाकर बनी और उसका श्रेय बाणेश्वर सिंह, अख्तियारपुर (पालीगंज) के स्वर्गीय कृष्ण नंदन प्रसाद सिंह उर्फ ‘सरदार जी’ और उनके वीर भाई जिन्होंने कंधा से कंधा मिला कर वामपंथी उग्रवादियों के खिलाफ़ जंग छेड़ा, चंद्रभूषण बाबु(गया जिला परिषद के पूर्व अध्यक्ष), रघुराज बाबु (लोकल बोर्ड के चेयरमैन), नुनु चंद्र भास्कर जी को जाता है,

स्वर्गीय कृष्ण नंदन प्रसाद सिंह को इस क्षेत्र के किसान याद करते हुये कहते हैं, “सोन से निकली नहरो मे जब भी पानी की कमी होती थी तो कैम्प कर वे पानी खुलवाते थे.. यही कारण है कि उन्हे लगातार तीन बार उस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला”, इस कृषि प्रधान क्षेत्र में आज भी नहरों का जीर्णोद्धार व पक्कीकरण प्रमुख समस्या बना हुआ है…..कालांतर में शूरमाओं में गिने जाने वाले कई इनसे कनिष्ठ रहे हैं, आज के तारीख में जहानाबाद लोक सभा के अंतर्गत यह एक बेहतरीन सीट है और कई पार्टियों के कई दावेदार यहाँ से टिकट के लिए इच्छुक रहते हैं, अब बात की जाए इस सीट के राजनीतिक यात्रा की: 
 
- पहली बार यह सीट हमारे पास बनेश्वर प्रसाद सिंह जी के माध्यम से खाते में आई जो 1977 में जनता पार्टी के उम्मीदवार थे, उन्हें कुल 35,926 मत प्राप्त हुए थे और उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के राम भवन सिंह को 12,072 मतों के अंतर से पराजित किया था;
 
- मई 1980 के चुनाव में कृष्ण नंदन प्रसाद सिंह बतौर निर्दलीय 20,744 मतों के साथ विजयी हुए, उन्होंने ‘भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (इंदिरा गुट) के देव कुमार शर्मा (D K Sharma) को कड़े मुकाबले में 1437 मतों के अंतर से पराजित किया;
 
- मई 1985 के चुनाव में अपने विजय यात्रा को आगे बढ़ाते हुए लगातार दूसरी बार निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में स्वर्गीय कृष्ण नंदन प्रसाद सिंह ने रिकॉर्ड 65,621 मतों के साथ कांग्रेस के टिकट पर लड़ रहे राम प्रसाद ओझा को 34,747 मतों के भारी अंतर से पराजित किया, यह उनके करियर का सबसे शानदार जीत रहा, इस चुनाव में कुल 20 उम्मीदवार मैदान में थे;
 
- एक बार फिर फरवरी, 1990 के चुनाव में स्वर्गीय कृष्ण नंदन प्रसाद सिंह, बतौर निर्दलीय तीसरी बार 38,902 मतों के साथ इस सीट से विधायक चुने गए, उन्होंने Indian People’s Front यानि IPF के टिकट पर लड़ रहे रामाधार सिंह को 5,272 मतों के अंतर से पराजित किया, इस चुनाव में कुल 29 उम्मीदवार मैदान में थे;
 
- 1995 के चुनाव में स्वर्गीय कृष्ण नंदन प्रसाद सिंह, भारतीय प्रगतिशील पार्टी के टिकट पर एक बार फिर से मैदान में उतरे लेकिन महज 13,442 मतों के साथ तीसरे स्थान पर सिमट गये;
 
- 2000 के चुनाव में फिर हमारी वापसी हुई जब राष्ट्रीय जनता दल के टिकट पर पूर्व मंत्री व वर्तमान राज्यसभा सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह जी ने 29,298 मतों के साथ CPI(ML)(L) के टिकट पर चुनाव लड़ रहे शाह चाँद को कड़े मुकाबले में 2,261 मतों के अंतर से परास्त किया, स्वर्गीय कृष्ण नंदन प्रसाद सिंह ने भी इस चुनाव में अपनी किस्मत आजमाई व Bihar People’s Party के टिकट पर 10,507 मतों के साथ वह चौथे स्थान पर रहे;
 
- फरवरी 2005 के चुनाव में इस सीट पर हम रेस से बाहर हो गए थे जब पहले व दूसरे स्थान पर क्रमशः LJP और RJD रही, इस सीट पर स्वर्गीय कृष्ण नंदन प्रसाद सिंह के बेटे रंजीत कुमार उर्फ ‘रिंकू’, जनता दल यूनाइटेड के टिकट पर 18,929 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे;
 
- अक्टूबर 2005 के चुनाव में भी स्वर्गीय कृष्ण नंदन प्रसाद सिंह जी के बेटे रंजीत कुमार उर्फ ‘रिंकू’ भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर 25,371 मतों के साथ दूसरे स्थान पर रहे, हार का अंतर 8,439 महज मतों का था;
 
- 2010 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर ग्राम-नीमा, पटना के रहने वाले चितरंजन कुमार जी ने 23,984 मतों के साथ अपने निकटतम प्रतिद्वंदी CPI(ML)(L) के टिकट पर लड़ रहे महानंद प्रसाद जो कि वर्तमान विधायक है, को 4,202 मतों के अंतर से परास्त किया और यह सीट वापस हमारे पाले में आ गया;
 
- 2015 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे चितरंजन कुमार 37,485 मतों के साथ दूसरे स्थान पर रहे व हार का अंतर 17,810 वोटों का था;
 
- 2020 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर लड़ रहे श्री दीपक कुमार शर्मा (ग्राम- बम्भई, जिला- अरवल) 48,336 मतों के साथ दूसरे स्थान पर रहे, हालाँकि मजबूत ध्रुवीकरण के कारण हार-जीत का अंतर 19,950 वोटों का था, फिर भी अभी तक किसी भी भाजपा या जदयू उम्मीदवार द्वारा हासिल किया गया यह सबसे ज्यादा मत हैं जिससे स्पष्ट है कि भविष्य में भी हमारी इस सीट पर मजबूत दावेदारी रहेगी;
 
= संकलन: साकेत बिहारी शर्मा

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