इन दिनों देश में गुजरात से दिल्ली तक, अयोध्या से मथुरा तक, जानकी #वल्लभ, सरदार #वल्लभभाई पटेल और राधे #वल्लभ जैसे नाम श्रद्धा के केन्द्र बन गए हैं। आप किसी #वल्लभ के प्रति श्रद्धा निवेदित कीजिए, आपकी राष्ट्रभक्ति 24 कैरेट सोना की तरह शुद्ध मानी जाएगी। अब भय, भूख और भ्रष्टाचार से लड़ाई का आह्वान करने वाली पार्टी के रत्नों में एक नया रत्न शामिल हो गया है। आप इसके लिए पार्टी के देवदुर्लभ कार्यकर्ताओं को नहीं, शीर्ष नेतृत्व को बधाई दीजिए। अब पोस्टर में, पंडालों में, मंचों पर मोकामा वाले नीलम #वल्लभ से लेकर सहरसा वाले 'लवली #वल्लभ' तक #वल्लभ ही #वल्लभ नजर आएंगे। #वल्लभ का चेहरा अब आत्म गौरव, बढ़ते बिहार और चारित्रिक मूल्यों का चेहरा बन गया है।
मंच पर दिव्य विभा कुछ ऐसे फैलीं कि उनके #वल्लभ के दामन का दाग धुल गया जी! यह सब सिर्फ 'गया जी' का प्रताप नहीं है। लोकतंत्र में और भी गया-गुजरा धाम है। आजकल उकी की महिमा है। अब करोड़ों देशवासियों की लोकतंत्र में आस्था और मजबूत होगी! मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि अगर कल गया जी में चारा चबाने-पचाने वाले राजा भी पधारे होते तो जंगल राज के सारे दाग धुल जाते। गया जी सचमुच मोक्षदायिनी हैं। मैं तो तेजस्वी - प्रतापी पुत्रों को नसीहत ही दे सकता हूं कि अपने पिता के दागों को धुलवाने के अवसर तलाशें। अगर इस धरा से प्रस्थान करने से पहले मोक्ष की गारंटी मिल जाए तो श्रवण कुमारों को भगीरथ प्रयास करने ही चाहिए। मेरा मानना है कि गया जी में समय-स्थान और ग्रह-नक्षत्रों का अद्भुत संयोग रहा होगा। गुजराती और बिहारी पंडों की जुगलबंदी जारी रहे तो अगले तीन-चार महीनों में दाग धुलवाने और मोक्ष प्राप्ति के पुण्य प्रयोग बार-बार दुहराए जाएंगे। राजनीतिक पंडित बताते हैं कि चुनावों के समय यह सुयोग घनीभूत होता है। लोकसभा चुनाव से पहले 'लवली #वल्लभ' बेदाग हो गए। जब वे सभाओं में और संगठन में बगुला भगत की तरह बैठते हैं तो उनका लिबास दमकता है। अगर किसी माई के लाल ने उन पर उंगली उठाई तो जीभ काटकर हाथ में थमा दी जाएगी। हर नदी मोक्षदायिनी नहीं होती। हर घाट पर दाग नहीं धुलते। अलग-अलग कालखंड में नदियों का महात्म्य घटता -बढ़ता रहा है। कभी सामाजिक न्याय वाली नदी भी पवित्र मानी जाती थी। साधु यादव और हेमलता यादव के पुत्र मृत्युंजय यादव जब उस पवित्र नदी में डुबकी लगाकर बेदाग घूमने लगते थे, तब जाकर शिल्पी- गौतम और चंपा विश्वास की आत्मा को शांति मिलती थी। संतप्त आत्माओं को मोक्ष दिलाने में सियासी धाराओं का गौरवशाली इतिहास लिखा जाना चाहिए। 'अन्नू #वल्लभ' मुगालते में थे। लालटेन लेकर सामाजिक न्याय की उस नदी में डुबकी लगा बैठे, जिसका घाट आजकल अपशगुनी हो गया है। लेने के देने पड़ गए। कभी 'रमा #वल्लभ' भी गलत घाट पर बैठे थे। अंजाम सबको पता है। रमा जब कमल सरोवर में डुबकी लगा दीं, उनके दिन फिर गए। यश, पद, प्रतिष्ठा के साथ माला और जयकारे! जो खुद दागदार हैं, वे दूसरे को मोक्ष कैसे प्रदान करेंगे? सोचना चाहिए था कि हर कीचड़ में कमल नहीं खिलता है। 'रावड़ी #वल्लभ' और 'अन्नू #वल्लभ' को पता होना चाहिए कि अच्छे दिन कहां और कैसे आते हैं। उन्हें 'लवली #वल्लभ' और 'राज #वल्लभ' से सीख लेनी पड़ेगी। चारा का दाग धुलवाने के लिए 'राबड़ी #वल्लभ' को कमल के फूल वाले सरोवर में डुबकी लगानी पड़ेगी। कीचड़ से लथपथ न होंगे तो कैसे निष्पाप कहलाएंगे। अगर भरोसा नहीं है तो अजीत पवार से सीखें। अल्प अवधि के लिए कीचड़ में डुबकी लगाएं। एक बार दाग धुल जाए तो फिर निकल भागें। पापों का प्रायश्चित सिर्फ फल्गु किनारे नहीं होता है। कमल- सरोवर में भी होता है। मेरा मन हलका हो गया है। मेरे मन में वर्षों से एक सवाल उठता आ रहा था। जब भारतीय जन मानस में सभी #वल्लभ श्रद्धा और प्रेम के प्रतीक हैं तो 'राज #वल्लभ' नाम में क्या बुराई है? इस नाम पर राजनीतिक दल झेंपते क्यों हैं? व्यक्ति के व्यक्तित्व पर उसके नाम का असर होता है। राज #वल्लभ आखिर अधम, नीच, पतित या पापी कैसे? आज से मैं चैन की नींद सो पाऊंगा। राज #वल्लभ भी आज से पवित्र और पूजनीय हो गया। जब पारस पत्थर के स्पर्श से निर्जीव लोहा भी सोना बन जाता है तो राज #वल्लभ भी किसी विचारधारा के स्पर्श से पवित्र क्यों नहीं हो सकता है? मुझे इसी दिन का इंतजार था। अच्छी संगति में आकर सबरी की तरह राज #वल्लभ का भी उद्धार होगा ! मेरा विश्वास सच निकला है। यह सब #वल्लभ शब्द का प्रभाव है। न्यायालय ने राज #वल्लभ को पाक-साफ घोषित किया।इतने से काम नहीं चलना था। डबल इंजन ने राज #वल्लभ की पाकीजगी पर मुहर लगा दी है। अगर बिहार को तरक्की के रास्ते पर ले जाना है। अगर भारत को विश्वगुरु बनाना है तो हमें राज #वल्लभ को भी वही मान-सम्मान देना होगा, जो हम अयोध्या वाले जानकी #वल्लभ को देते आए हैं। आने वाले दिनों में जानकी #वल्लभ और राज #वल्लभ के पुण्य प्रताप से बिहार अपने गौरवशाली अतीत को हासिल करेगा। मुझे पूरा विश्वास है कि आज की रात नवादा जिला के रहुई प्रखंड की नाबालिग रेप पीड़िता भी चैन की नींद सोएगी। अगर राज #वल्लभ ने उस नाबालिग को छुआ भी होगा तो आज से वह 'अनचाहे परन्तु पवित्र' स्पर्श से बिल्कुल पवित्र मानी जाएगी। ऐतिहासिक स्पर्श से वह अहिल्या हो गई। कल तक मारे शर्म के घर से बाहर नहीं निकल रही थी। अब सीना तानकर चलेगी। एक सप्ताह पहले उसने रुआंसा होकर मीडिया को बताया, न न्याय मिला और न नौकरी। भले ही नौकरी नहीं मिली, उसे न्याय मिल गया है। अब उसकी शिकायत दूर हो गई होगी। राज #वल्लभ अब डबल इंजन की गारंटी बन गया है। राज #वल्लभ का चेहरा बिहार के विकास का चेहरा बनेगा। राज #वल्लभ का चेहरा बिहार के मतदाताओं में भरोसा पैदा करेगा। यह चेहरा महिलाओं और खासकर नाबालिग लड़कियों को हौसला, हिम्मत, इज्जत की गारंटी देगा। एक मामले में उस राजनीतिक दल के शेयर होल्डर से सीख लेनी पड़ेगी, जिसने आपरेशन ब्लूस्टार के लिए माफी मांगी। क्या अब उन दलों को राज #वल्लभ के पैर छूकर माफी नहीं मांगनी चाहिए, जो कल तक विधायक विभा देवी के #वल्लभ - 'राज #वल्लभ' को अधम, नीच और पापी कहते नहीं थकते थे। विभा देवी को पवित्र गया जी के मंच पर बैठाने या डबल इंजन मार्का टिकट देने के बावजूद प्रायश्चित अधूरा रह जाएगा। हमे हर चुनावी मंच पर उपाध्याय जी, मुखर्जी जी, लोहिया- जयप्रकाश की तस्वीरों के बगल में विभा के #वल्लभ की तस्वीर रखकर फूल माला चढ़ाना चाहिए। इससे सामाजिक समरसता बढ़ेगी। अब तो न्यायालय ने उन्हें बेकसूर बताया है। आने वाले दिनों में हमें जिला मुख्यालयों में राज #वल्लभ जी के मंदिर बनवाने चाहिए। नई पीढ़ी प्रेरणा ग्रहण करेगी। राज #वल्लभ जी की कहानी सुनाई जाएगी। उन पर कैसे-कैसे आरोप मढ़े गए। उन पर क्या गुजरी होगी। नादानी में कुछ राजनीतिक दलों ने भी चरित्र हनन किया। जेल में बंद किए गए, परन्तु बेचारे ने हिम्मत नहीं हारी। जेल से संघर्ष किया। पत्नी को आगे किया। विभा देवी ने उत्तराधिकारी बनकर पति की ओर से लड़ाई लड़ी। बिरादरी वालों को बाबा केवल साह के मंदिरों से प्रेरणा लेकर बाबा राज #वल्लभ के मंदिर का निर्माण कराना चाहिए। राज #वल्लभ के बगल में विभा देवी एक हाथ में तीर और दूसरे में कमल लेकर विराजेंगी। यह सब राज #वल्लभ के जीते जी हो जाए तो अच्छा। गुजराती- बिहारी पंडों से मंदिर का अनावरण कराना चाहिए। आने वाली पीढ़ियां राज #वल्लभ महाराज के मंदिर में शीश नवाकर उनके व्यक्तित्व व कृतित्व से प्रेरणा ग्रहण करेंगी। अगर जेएनयू या बीएचयू के विद्वान शिक्षक चाहें तो संत राज #वल्लभ महाराज के जीवन वृत्त पर शोध करा सकते हैं। शोध के दौरान तलहटी से जो खाद निकलेगा, उससे लोकतंत्र की जड़ मजबूत होगी। लोगों की आस्था बढ़ेगी। हमारे धर्मग्रंथों और इतिहास के पुस्तकों में ऊंगली माल डांकू, वाल्मीकि उर्फ रत्नाकर की कथाएं प्रचलित हैं। आज से इस शृंखला में राज #वल्लभ नाम जुड़ गया है।
Sri Bibhesh Trivedi जी के कलम से..
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