Tuesday, 13 January 2026

पटना के मुन्ना चक स्थित शम्भु हॉस्टल कांड की पीडिता, जहानाबाद के पतियावाँ की बेटी को न्याय दो


 

जहानाबाद के शकूराबाद अंतर्गत पतियावाँ ग्राम की एक होनहार बेटी, जो पटना के मुन्ना चक स्थित शम्भु हॉस्टल में रहकर ऑनलाइन NEET परीक्षा की तैयारी कर रही थीं, उसे संदिग्ध व गंभीर परिस्थितियों में मेदांता अस्पताल स्थानांतरित किया गया, जहाँ उपचार के क्रम में दिनांक-11.01.2026 को उसकी मृत्यु हो गई।

दिनांक 13.01.2026 को इस संबंध में #श्री_कार्तिकेय_के०_शर्मा (वरीय पुलिस अधीक्षक, पटना) द्वारा प्रेस को दिए गए बयान के अनुसार यह आत्महत्या का मामला लगता है जबकि post-mortem रिपोर्ट अभी नहीं आया है। 

मामले में संबंध में परिजनों से हुई बात के अनुसार निम्न बातें संदेह के घेरे में हैं: 

- पीडिता के संबंध में परिवार को जानकारी किसी third party के द्वारा परिजनों को दी गई ना कि hostel संचालक के द्वारा, सवाल है कि तबियत बिगड़ने की जानकारी पीडिता के अभिभावकों को तुरंत हॉस्टल संचालकों द्वारा क्यों नहीं दी गई ?

- परिजनों का यह भी कहना है कि पीड़िता से उनकी अंतिम बात दिनांक 05 जनवरी को रात में हुई थी, तो सवाल है कि 05 जनवरी से 06 जनवरी यानि पीडिता को hostel से अस्पताल ले जाने के बीच का cctv footage कहाँ है ? 

- पुलिस के नजरों में यह अगर आत्महत्या का मामला है तो आत्महत्या की वजह क्या है ? क्योंकि परिजनों का स्पष्ट कहना है कि पीड़िता मानसिक रूप से बिल्कुल स्वस्थ थी, और किसी भी विषय को लेकर परेशान नहीं थी और न वह अपने परिवार के सदस्यों को परेशान नजर आती थी और न ही कभी ऐसी बात उसने परिवार के सदस्यों को बताया था जिससे वह परेशान हो। तो प्रशासन यह बताये कि आत्महत्या का क्या कारण है ? कोई suicide note मिला है या नहीं ?

- नींद की गोलियों से संबंधित drug overdose की बात भी मीडिया में आई है तो सवाल है कि जब नींद की परेशानी पीड़िता को थी ही नहीं और न किसी डॉक्टर ने उसे दवा लिखा था तो हॉस्टल में यह प्रतिबंधित दवा कैसे आया ? कहाँ से आया ? कौन लाया ? और क्या यह संभव नहीं है कि वह नींद की गोलियां उसे जबरदस्ती दी गई हो ताकि मामले को भटकाया जा सके ?

- किसी स्त्री रोग विशेषज्ञ के हवाले से बताया गया कि बलात्कार का मामला नहीं है तो जब post mortem हुआ ही नहीं, फिर किस आधार पर यह स्त्री रोग विशेषज्ञ व पुलिस मामले से जुड़े आरोपियों को clean cheat खुद से बाँट रहे हैं ? पुलिस का काम तहकीकात करना है कि कोर्ट की तरह निर्णय देना ?

- सवाल है कि पीडिता के शरीर पर चोट के निशान कहाँ से और कैसे आए जिसकी अखबारों में चर्चा है ? 

- मीडिया में एक आईपीएस अधिकारी का बयान दिखता है जहां वह प्रदर्शनकारियों से ही सबूत मांग रहे हैं तो सवाल है कि सबूत इकठ्ठा करना, मामले के तह तक जाने की जिम्मेदारी आम लोगों की है या पुलिस की ? फिर पुलिस की नौकरी किसलिए है ?

- सवाल है कि पीडिता के कमरे में या पीडिता के अगल बगल के कमरों में, मुन्ना चक स्थित शम्भु हॉस्टल में रहने वाली लड़कियों से क्या पुलिस ने अब तक पूछताछ की है ? 

- सवाल है कि पुलिस आरोपियों को निर्दोष साबित करने के बजाय साक्ष्य/ सबूत मिटाने के बारे में क्यों नहीं बात कर रही है ? परिजनों का आरोप है कि हॉस्टल संचालकों ने पीडिता को दिनांक 06 जनवरी को दरवाजा तोड़कर निकालने की बात कही जबकि उन्होंने जब हॉस्टल जाकर देखा तो दरवाजा टूटा हुआ नहीं मिला, ऐसा क्यों ? 

- सवाल है कि पीडिता की हॉस्टल में बिगड़ती स्थिति से लेकर अस्पताल में भर्ती तक का कोई फोटो या विडिओ क्यों नहीं है ? 

- सवाल है कि पुलिस प्रशासन हॉस्टल संचालकों से लेकर अस्पताल के डॉक्टर का call details क्यों नहीं निकालकर देखती जिससे यह समझा जा सके कि संदेह में घेरे में आने वाले लोग घटना के पहले और बाद में किन किन लोगों के संपर्क में थे ?

- प्रशासन का कहना है कि युवती के मोबाइल फोन की गूगल सर्च हिस्ट्री के अवलोकन से यह तथ्य सामने आया है कि उसने पूर्व में आत्महत्या एवं नींद की दवाओं से संबंधित विषयों पर सर्च किया था। तो सवाल है कि पूर्व में मतलब कब ? Search history में समय कब का है ? कहीं ऐसा तो नहीं कि आत्महत्या का मामला बनाने के लिए पीडिता के अचेत अवस्था में इस प्रकार का search किया गया ताकि वह history में दिखने लगे। 

 

पुलिस conference का विडिओ लिंक: https://www.facebook.com/share/v/17Q7AU1NFV/ 

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